सन्तोष कुमार चतुर्वेदी की कविताएं
कविता लिख कर कविता लिखने का कोई पाठ्यक्रम नहीं कविताई की कोई कक्षा नही कोई अध्यापक तक नहीं बता पाता कैसे लिखी जाए कि बन जाए कविता यहाँ तक कि कोई तय मानक तक नहीं कविता लिखने का कविता लिख कर आप एक मनुष्य तो बन सकते हैं लेकिन आजीविका नहीं चला सकते हाँ, कविता लिखने के जुर्म में आपको देशद्रोही जरूर ठहराया जा सकता है जेल हो सकती है देश निकाला हो सकता है फांसी पर झूलना पड़ सकता है फिर भी दुनिया भर में तमाम लोग लिखते रहते हैं आज भी कविताएँ डर के ख़िलाफ़ कविता डंट कर खड़ी हो जाती है दुनिया भर में कहीं भी अलग अन्दाज़ की वजह से ही कविता के लिए तयशुदा जैसा कुछ भी नहीं यह अनगढ़पन कविता की ज़िद है कविता किसी भी कवि को ज़िंदा रखने की एक आदत जैसी है। बातें आपस में बातें करने की कला आदमी को इंसान बनाती है जब तक बने रहते हैं बातों के पुल आवाजाही बनी रहती है मनुष्यता की सड़क जाम होने का अंदेशा नहीं रहता कभी-कभी ऐसा कुछ होता है कि एक दिन हम किसी कारणवश अचानक आपस में बातें करना बन्द कर देते हैं और जब भी ऐसा होता है अपने ही बारे में कमियों से ह...