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आनन्द बहादुर की कहानी 'गुस्ताख'

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आनन्द बहादुर  जीवन में हर व्यक्ति की अपनी विशिष्ट भूमिका होती है और वह अपने तरीके से उसका निर्वहन भी करता है। उस विशिष्ट व्यक्ति की अपनी एक जगह होती है जिसे सिर्फ और सिर्फ वही भरता है। कोई और उस जगह को भर नहीं पाता। गुस्ताख़ कहानी में आनन्द बहादुर एक ऐसे पात्र को सामने ले कर आते हैं जो आवाजों की नकल हू ब हू उतारा करता है। दो मित्रों के बीच की दूरी को अपनी नकली आवाज से न केवल पाटता है बल्कि दोनों के जीवन के उन रहस्यों को भी जान लेता है जो दोनों के दिलों दिमाग में हैं। यह उन दिनों की बात है जब घरों में लैंड लाइन फोन हुआ करते थे और जिसे एक अलग अंदाज में डायल किया जाता था। अब तो स्मार्टफोन का जमाना है जिसमें ट्रू कालर कॉल करने वाले व्यक्ति के बारे में सब कुछ बता देता है। यह कहानी दो मित्रों की उस मनोस्थिति की बात करते हुए भी उस व्यक्ति की उपस्थिति को करीने से दर्ज करती है जो सिर्फ आवाजों की नकल किया करता था। आज आनन्द बहादुर का जन्म दिन है। उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं। आइए इस अवसर पर आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं आनन्द बहादुर की कहानी 'गुस्ताख'। कहानी 'गुस्ताख...

आनन्द बहादुर की कहानी 'चीजें'

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आनन्द बहादुर  मनुष्य की निर्मिति में उसके आसपास की चीजों, परिस्थितियों, सम्बन्धों, समय, देश, काल का बड़ा हाथ होता है। कहा जा सकता है कि मनुष्य के वृत्त का निर्माण इन सब से ही होता है  घटनाएं और परिस्थितियों मनुष्य और मनुष्य के स्वभाव को समय के अनुसार बदल डालते हैं। आनंद बहादुर मनुष्य के इस वृत की पहचान करते हुए अपनी कहानी 'चीजें' में उचित ही लिखते हैं : "भीतर ही भीतर अव्यवस्थित होते चले जाना। भीतर की हर चीज का गलत जगह पर रख दिया जाना। महसूस करना। जाने कब से ऐसा करते करते यहाँ तक चले आना। एक चीज को उठाना, उसे गलत जगह पर रख देना, और भूल जाना। इस तरह धीरे-धीरे सारी चीजें गलत जगहों पर रखते चले जाना। और अब लगता है, वह खुद ही, किसी दूसरी जगह पर था। जहाँ था, जहाँ उसने सोच रक्खा था कि वह था, वहाँ वह था ही नहीं। न तो वहाँ, जहाँ उसने सोचा था कि उसे होना चाहिए था।" यह कहानी मनुष्य के आत्मगत परिस्थितियों की पड़ताल करती है। यह कहानी लेखक के आने वाले कहानी संग्रह 'गुस्ताख़ और अन्य कहानियाँ', आपस प्रकाशन, अयोध्या (उ प्र) में शामिल है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं आनंद बहा...