होली पर कविताएं
होली पर कविताएं प्राचीन भारतीय सामाजिक एवम आर्थिक व्यवस्था मूलतः कृषि पर आधारित थी। इसीलिए भारतीय परिदृश्य में जो भी तीज त्यौहार दिखाई पडते हैं उनके मूल में कृषि से जुड़ाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है। होली भी ऐसा ही त्यौहार है। इस समय खेत में गेहूं, सरसों, अलसी, मटर जैसी फसलें पक कर तैयार हो जाती हैं। स्वाभाविक रूप से किसान अन्न को घर में लाने के लिए बेसब्र रहता है। एक ऐसे में होली का त्यौहार महत्वपूर्ण बन जाता है। इसके बहाने लोग अपने घरों की साफ सफाई करते हैं और घर आने वाले अन्न के स्वागत की तैयारी करते हैं। होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं है बल्कि यह उमंगों का भी त्यौहार है। होली पर कई कवियों ने महत्वपूर्ण कविताएं लिखी हैं। पहली बार की तरफ से अपने रचनाकारों और पाठकों को होली की रंग बिरंगी बधाई देते हुए आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं होली पर हिन्दी और उर्दू के कुछ महत्वपूर्ण कवियों की कविताएं। अमीर खुसरो अमीर खुसरो दैया री मोहे भिजोया री दैया री मोहे भिजोया री शाह निजाम के रंग में कपरे रंगने से कुछ न होंवत है या रंग में मैंने ...