प्रभाकर सिन्हा का आलेख 'विवाह के विरुद्ध'
प्रभाकर सिन्हा डॉ. प्रभाकर सिन्हा (जन्म 1938) देश के प्रमुख नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं में से एक हैं। वे पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ (PUCL) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्षों से लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा UAPA, AFSPA और भारतीय दंड संहिता की धारा 124A जैसे दमनकारी कानूनों के विरुद्ध संघर्षरत हैं। उन्होंने भाषा विज्ञान में सिक्किम की आदिवासी भाषा 'लेप्चा' पर शोध किया। 1964 में उन्होंने विवाह संस्था पर "Absolution of Marriage Institution" नामक विचारोत्तेजक लेख लिखा, जो 'क, ख, ग' पत्रिका में प्रकाशित हुआ। इसका हिंदी अनुवाद प्रोफेसर नित्यानंद तिवारी ने किया, जिस पर आगे 'मध्यमा' पत्रिका में चर्चा हुई। बाद में श्री अशोक सेकसरिया द्वारा यह लेख राजकिशोर जी तक पहुँचा, जिन्होंने इसे 1997 में 'दूसरा शनिवार' पत्रिका में पुनः प्रकाशित किया। प्रभाकर जी स्वतंत्र विचारक रहे हैं, किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े और उनका लेखन साहस, विवेक तथा सामाजिक पुनर्विचार का प्रतीक है। सभ्यता के विकास के साथ साथ मनुष्य ने कुछ ऐसी संस्थाएं और व्यव...