नेहा अपराजिता की कविताएं
नेहा अपराजिता मां दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता है। गर्भ में बच्चे के आने के साथ ही मां सपने बुनने लगती है। वह अपने गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा के लिए हर कष्ट सह कर भी हरसम्भव प्रयास करती है। नाभिनालबद्ध बच्चा मां पर ही पूरी तरह निर्भर होता है। जन्म देने के पश्चात भी मां की अपने शिशु के प्रति ममता कम नहीं होती। वह उसकी प्रगति और विकास के लिए हरदम सन्नद्ध रहती है। युवा कवयित्री नेहा अपराजिता ने 'मां का गर्भ' जैसी महत्त्वपूर्ण कविता लिख कर अपनी सघन दृष्टि का परिचय दिया है। हम पहले भी ब्लॉग पर नेहा की कविताएं पढ़ चुके हैं। आइए एक बार फिर आज हम पहली बार पर पढ़ते हैं नेहा अपराजिता की कविताएं। नेहा अपराजिता की कविताएं “त्वमेव सर्वं मम् देवदेव” जिन्हें मिटना पसन्द था वे मिटने के लिए मिट्टी में सने रहे झुकने की दुनिया में सब झुक रहे थे झुकने की शर्त थी कि वे मिट नहीं सकते थे मिटने की शर्त थी लम्बवत, सीधा और सपाट रहना जिससे दूर से मारे जा सकें सपाट संज्ञा पर कंकड़ इसी तरह मिट्टी और मिटने वाले की कीमत कम होती जा रही इसी तरह बढ़ती जा रही झुकी हुई रीढ़ की संख्या जैसे गायब हुई थी मनुष्य की पूँछ...