श्री प्रकाश मिश्र का संस्मरण 'स्मृतियों में बसा नगर : बनारस'
श्रीप्रकाश मिश्र हर व्यक्ति अपने अतीत के बारे में सहज ही जिज्ञासु होता है। प्रकारांतर से यह जिज्ञासा ही उसे भविष्य के प्रति जवाबदेह बनाती है। ऐसे में ये संस्मरण बड़े काम आते हैं। साहित्यकारों का सरोकार थोड़ा बड़ा होता है इसलिए उनके संस्मरणों का आयाम भी व्यापक होता है। श्रीप्रकाश मिश्र के पास संस्मरणों का एक समृद्ध खजाना है जिसे वे आजकल अपने फेसबुक लेखन के जरिए उद्घाटित कर रहे हैं। श्रीप्रकाश मिश्र ने 'उन्नयन' पत्रिका का सम्पादन किया। इस पत्रिका के कुछ विशेषांक आज भी याद किए जाते हैं। श्रीप्रकाश जी का शुरुआती समय बनारस में बीता। वह बनारस जो उस समय साहित्यिक रूप से काफी समृद्ध था। बच्चन सिंह, शुकदेव सिंह, शिव प्रसाद सिंह के अलावा नामवर सिंह का साहित्यिक ही नहीं अकादमिक वर्चस्व भी था और एक ही जगह होने के नाते इनकी कुछ आपसी राजनीति भी। चन्द्रबली सिंह, अशोक पाठक, ब्रह्मा शंकर पांडेय से श्री प्रकाश जी का सम्पर्क था और वे इनके साथ ही वे साहित्यिक सरोकारों से शिद्दत से जुड़े। श्रीप्रकाश मिश्र के इन संस्मरणों को पढ़ते हुए कई महत्वपूर्ण प्रसंगों से हम वाकिफ होते हैं। मसलन ...