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टॉम एलियट की कविता "हॉलो मेन" का आशीष बिहानी द्वारा किया गया अनुवाद

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एलियट आज पहली बार पर प्रस्तुत है टॉम एलियट की चर्चित कविता "हॉलो मेन". इसका अनुवाद किया है युवा कवि आशीष बिहानी ने. साथ में दी गयी टिप्पणी भी आशीष की ही है. तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं टॉम एलियट की चर्चित कविता "हॉलो मेन"     टॉम एलियट दुनिया के सबसे ज़्यादा पूजे और हड़काए गए लेखकों में से एक है. उनके विशाल लेखन कर्म में कम से कम तीन-चार जगह यहूदी चरित्रों के खिलाफ सीधे सीधे जातिगत घृणा की भावना दिखाई दी थी. होलोकॉस्ट के बावजूद एलियट ने न कभी उन अभिव्यक्तियों को सुधारा , न ही कभी माफ़ी मांगी. कई बार यह अजीब लगता है कि यह वही कवि है जिसने भारतीय दर्शन को गहराई से समझा , एक ऐसे वक़्त में जब नस्ली उन्माद से भरा यूरोपीय अकादमिया उस दर्शन की महत्ता को नकार चुका था. (वही समझ जिसके तहत वेंडी डोनिजर इंडोलौजिस्ट कहलाती है) अपने आदर्श नागार्जुन की तरह ही एलियट बहुत बड़े संदेहवादी पर मध्यममार्गी थे. एलियट का समस्त जीवन यूरोप की आदिम भयावहता और आधुनिकता के बीच का मार्ग ढूंढते हुए निकला. यही कारण था कि जिस एलियट ने बर्टरैंड रसेल को भी आस्थावान करा...

आशीष बिहानी की कविताएँ

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आशीष बिहानी मेरा नाम आशीष बिहानी है। मैं बीकानेर से हूँ और वर्तमान में कोशिका एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र , हैदराबाद में पी-एच. डी. कर रहा हूँ। मेरा पहला संग्रह " अंधकार के धागे" हिन्द-युग्म द्वारा दिसंबर २०१५ में प्रकाशित किया गया। इसके अलावा मेरी कविताएँ ‘संभाव्य’ , ‘ अनुनाद’ , ‘ समालोचन’ , ‘ यात्रा’ , ‘ गर्भनाल’ द्वारा प्रकाशित की गयीं हैं।   रसूल हमजातोव ने ‘मेरा दागिस्तान’ में लिखा है – ‘यह मत कहो कि मुझे विषय दो, यह कहो कि मुझे आँखें दो।’ कवि के पास यह आँख होना बहुत जरुरी होता है। युवा कवि आशीष बिहानी की कविताओं को पढ़ते हुए इस बात का स्पष्ट आभास हुआ कि उनके पास यह आँख है। हिन्दी कविता में ऐसे कवियों की फेहरिश्त में अब आशीष का नाम भी पुख्तगी से जुड़ गया है जो विज्ञान की पढाई करने के साथ-साथ कविता भी लिख रहे हैं। कल्पना के साथ यथार्थ की जमीन से जुड़े रहने की तहजीब है यह ‘विज्ञान और साहित्य का संगम’। यह सुखद है कि आशीष के पास इस संगम की समृद्ध थाती है।   मानव द्वारा आविष्कृत महत्वपूर्ण तकनीकी चीजों की सूची अगर बनायी जाय तो उसमें रेल का स...