कुँवर रवीन्द्र की कविताएँ
के. रवीन्द्र कुँवर रवीन्द्र न केवल बेहतरीन चित्रकार हैं बल्कि एक संवेदनशील कवि भी हैं । हाल ही में रवीन्द्र का पहला कविता संग्रह 'रंग जो छूट गया है' अनंग प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है । इसकी भूमिका लिखी है युवा आलोचक उमाशंकर सिंह परमार ने । आज हम उमाशंकर की उस भूमिका के साथ ही कुँवर रवीन्द्र की कुछ नयी कविताओं को प्रस्तुत कर रहे हैं । चमक उठा है तेरी लय में दर्द हिन्दोस्ता उमाशंकर सिंह परमार कविता का सौन्दर्य कवि के निजी रचनात्मक संघर्षों से पृथक नहीं होता है । सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनो धरातल में अनुभूत संवेदन ही तथ्य बन कर उपस्थित होते हैं । ये तथ्य जब संवेदक के मनोजगत मे हलचल करते हुए आन्तरिक विक्षोभ के कारण बनते हैं तो वहीं से अभिव्यक्ति की तमाम प्रक्रियाओं की खोज आरम्भ हो जाती है । कवि और कलाकार की रचनाप्रक्रिया में अन्तर नहीं होता न ही यथार्थ जन्य संघर्षों द्वारा उपार्जित ' मैटर" में तात्विक भेद होता है । बस फार्मेट बदलता है अभिव्यक्ति के माध्यम बदलते हैं । अभिव्यक्ति के माध्यम बदल जाने पर भी कं...