मदन कश्यप की कविताएँ
मदन कश्यप इस बात में कोई सन्देह नहीं कि मनुष्य बुद्धिमान प्राणी है। यह बुद्धि इसे और जीवधारियों से अलग खड़ा करती है। लेकिन मनुष्य के इस बुद्धि की खूबी यह है कि वह दूसरे मनुष्य से चालाकी दिखाने की कोशिश करता है यानी कि दूसरों को मूर्ख बनाने का काम करता है। चालाक लोग दूसरों को मूर्ख बना कर खुद को आत्मतुष्ट महसूस करते हैं। लेकिन वे यह नहीं समझ पाते कि ऐसा कर वे मनुष्यता की भावना को चोट पहुंचाते हैं। अपनी कविता चालाक लोग में मदन कश्यप लिखते हैं 'वे पाँव गंवा कर जूते बचा लेते हैं/ और शान से दुनिया को दिखाते हैं!' मदन कश्यप समकालीन हिंदी कविता के चर्चित कवि हैं। उन्होंने कविता के माध्यम से आम जन के दुखों और परेशानियों को संजीदगी से रेखांकित करने का महत्त्वपूर्ण काम किया है। मदन कश्यप के महत्वपूर्ण कविता-संग्रह हैं, 'अपना ही देश', 'गूलर के फूल नहीं खिलते', 'लेकिन उदास है पृथ्वी', 'नीम रोशनी में', 'कुरुज', 'दूर तक चुप्पी', 'पनसोखा है समुद्र'। हाल ही में उनका नया कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है 'बस चांद रोएगा'। कवि को जन्...