असमिया के चर्चित कवि रंजीत दत्ता की कविताएं
रंजीत दत्ता किसी भी मनुष्य की आधारभूत आवश्यकता होती है उसका घर। अपने घर पर वह सुकून महसूस करता है। घर से उसकी अनुभूतियां जुड़ी होती हैं। घर से उसके सपने और उम्मीदें जुड़ी होती हैं। वह काम के लिए घर से बाहर निकलता है और फिर लौट आता है सुकून के कुछ पलों के लिए अपने घर। घर एक तरह से उसकी छोटी सी दुनिया हो जाती है। हालांकि आदमी जानता है कि एक दिन उसे बीत जाना है। और तब यह घर बेगाना हो जाएगा। फिर भी घर तो घर ही होता है। कवि कुंवर नारायण की एक कविता है 'घर रहेंगे'। कविता इस प्रकार है : 'घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएँगे/ समय होगा, हम अचानक बीत जाएँगे/ अनर्गल ज़िंदगी ढोते किसी दिन हम/ एक आशय तक पहुँच सहसा बहुत थक जाएँगे।' आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं असमिया के चर्चित कवि रंजीत दत्ता की कविताएं। इन कविताओं का हिन्दी अनुवाद किया है पंखुरी सिन्हा ने। रंजीत दत्ता की कविताएं (चर्चित असमिया कवि) हिन्दी अनुवाद : पंखुरी सिन्हा घर सजाया गया सावधानीपूर्वक एक घर एक पागल चाहत खुशगवार रहन के लिए बन्द सुरक्षित एक बार और दोबारा हर कोना, हर चप्पा सुसज्जित भल...