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इशिकावा ताकुबोकु के कुछ चुनिन्दा ताँका

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इशिकावा ताकुबोकु ताँका" जापान का बहुत ही प्राचीन काव्य रूप है। यह क्रमशः 05,07,05,07,07 वर्णानुशासन में रची गयी पंचपदी रचना है , जिसमें कुल 31 वर्ण होते हैं। व्यतिक्रम स्वीकार नहीं है। " हाइकु" विधा के परिवार की इस "ताँका" रचना को "वाका" भी कहा जाता है। " ताँका" का शाब्दिक अर्थ "लघुगीत" माना गया है। "ताँका" शैली से ही 05,07,05 वर्णक्रम के "हाइकु" स्वरूप का विन्यास स्वतंत्र अस्तित्व प्राप्त किया है।   ताँका" अतुकांत वर्णिक छंद है। लय इसमें अनिवार्य नहीं , परंतु यदि हो तो छान्दसिक सौंदर्य बढ़ जाता है। एक महत्वपूर्ण भाव पर आश्रित "ताँका" की प्रत्येक पंक्तियाँ स्वतंत्र होती हैं । कम शब्दों में अपनी बात कह देना हमेशा मुश्किल भरा होता है। जापान की हाइकू परम्परा के कवि यह काम मात्र तीन पंक्तियों में कर डालते हैं। हाइकु विधा के परिवार की एक चर्चित विधा है - "ताँका" । इशिकावा ताकुबोकु के हाइकू जापान में काफी ख्यात हैं। इनकी कुछ हाइकू का अनुवाद किया है उज्ज्व...