विजय गौड़ की कहानी 'मासिक प्रीमियम'
विजय गौड़ कवि, कहानीकार और उपन्यासकार विजय गौड़ नहीं रहे। आजकल वे देहरादून में रह रहे थे। विजय जीवट से भरे हुए एक खूबसूरत इंसान थे। थियेटर जैसे उनकी रगों में बहता था। यारबाश थे लेकिन अपने घर परिवार पर भी पर्याप्त ध्यान देते थे। बीते 18 अक्टूबर 2024 को उन्होंने बिटिया पवि के हाथ पीले किए थे। दिल के गम्भीर दौरे के बाद पिछले पांच दिनों से वे दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती थे। कल उनका निधन हो गया। उनके अचानक जाने की खबर सुन कर हम सब हतप्रभ हैं। जिस उम्र में उन्होंने दुनिया छोड़ी, आमतौर पर वह जाने की उम्र नहीं होती। पहली बार के लिए जब भी उनसे रचना मांगी, उन्होंने हमें त्वरित गति से सहज ही उपलब्ध कराया। उनका ब्लॉग 'लिखो यहां वहां' हिन्दी का चर्चित ब्लॉग था। उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आज हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं उनकी कहानी 'मासिक प्रीमियम'। 'मासिक प्रीमियम' विजय गौड़ पति-पत्नी दोनों बेहद खुश थे। मौका भी खुशी का ही था। वैसे खुश रहने के लिए मदान फैमिली को मौकों की जरूरत नहीं थी। पिछले कुछ सालों से तो जैसे खुशी की नदी ही उ...