विजय मोहन सिंह से अमरेन्द्र कुमार शर्मा की एक ख़ास बातचीत
विजय मोहन सिंह बहुमुखी प्रतिभा वाले विजय मोहन सिंह का अभी हाल ही में गुजरात में निधन हो गया। वे एक कहानीकार के साथ-साथ उपन्यासकार, बेहतर आलोचक, उम्दा सम्पादक और फिल्म संगीत के अच्छे जानकार थे। वे अपनी तरह के अनूठे आलोचक थे जिन्होंने बनी बनायी लीक से इतर अपनी अवधारणाएँ विकसित की और उसे दो-टूक व्यक्त करने में कभी नहीं हिचके। ‘गोदान’ हो, ‘राग-दरबारी’ हो या ‘हमजाद’ जैसी नामचीन कृतियाँ, विजय मोहन जी ने हमेशा अपनी अलग राय व्यक्त कीं। कहानी में विजय मोहन जी उस ‘हिडेन फैक्ट’ के सशक्त पक्षधर थे, जिसमें कहानीकार को अपनी कहानी में पाठकों के लिए बहुत कुछ छोड़ना होता है। जिन दिनों विजय मोहन सिंह वर्धा विश्वविद्यालय में ‘राईटर्स इन रेजिडेंस’ नियुक्त हुए थे, डॉ. अमरेन्द्र कुमार शर्मा ने उनसे एक ख़ास बातचीत की थी जिसे हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। विजय मोहन सिंह से अमरेन्द्र कुमार शर्मा की एक ख़ास बातचीत आप वही ‘एक बँगला बने न्यारा’ वाले अमरेन्द्र कुमार शर्मा - आपका जीवन और आपकी रचना-प्रकिया?...