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राजेन्द्र कुमार की कविताओ पर शिवानन्द मिश्र का आलेख ‘हमें सब पता है उस्ताद’

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  राजेंद्र कुमार राजेन्द्र कुमार कुछ उन कवियों में से एक हैं जो चुपचाप अपने रचना कर्म में सक्रिय रहने में विश्वास करते हैं. उनकी जनपक्षधरता से हम सभी परिचित हैं.  राजेन्द्र  कुमार जी ने अभी अपने जीवन के 75 साल पूरे किये हैं.  राजेन्द्र  कुमार की कविताओ की एक आलोचनात्मक पड़ताल की है युवा कवि और कहानीकार शिवानन्द मिश्र ने। आज पहली बार पर प्रस्तुत है शिवानन्द मिश्र का यह आलेख ‘ हमें सब पता है उस्ताद ’।             हमें सब पता है उस्ताद शिवानंद मिश्र   राजेन्द्र कुमार जी का नाम उन कवियों में शुमार है जो अपनी जनपक्षधरता के लिए जाने जाते हैं. राजेन्द्र जी नकारात्मक परिस्थितियों से भी सकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करने की बात करते हैं जिसकी मिसाल उनका काव्य संग्रह ‘ ऋण गुणा ऋण ’ है. उनका मानना है कि हर कोशिश चाहे वह छोटी हो या बड़ी , अपने आप में बगावत है उस जड़्ता से , उस नकारात्मकता से जो हमारे आस-पास फैली है. इस बगावत की चाह में वो किसी असाधारण और भव्य की ओर नहीं जाते बल्कि अपने आप को साधारण और आ...