आदित्य पाण्डेय की कविताएं
आदित्य पाण्डेय लम्बी कविताएं लिखना हंसी खेल नहीं होता। यह अत्यन्त दुष्कर होता है। खासकर लम्बी कविता की प्रवाहमानता को कुछ इस तरह बनाए रखना कि वह संप्रेषणीय हो सके। युवा कवियों के लिए तो यह और भी मुश्किल होता है। आदित्य पाण्डेय युवा कवि हैं। उनकी कविताएं प्रायः लम्बी हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है। ऐसा जो लम्बी कविताओं में ही कहा जा सकता है। उनकी नजर लगातार अपने समय और समाज पर है। राजनीति उससे भला अछूती कैसे रह सकती है। वरिष्ठ कवि आलोचक नासिर अहमद सिकन्दर उनकी कविताओं की तहकीकात करते हुए उचित ही कहते हैं कि 'अपनी इस कविता के माध्यम से आदित्य नीति के बरअक्स दुर्नीति एवं दुर्नीति के बरअक्स नीति की समकालीन समय में नई परिभाषा रचते हैं।' हर महीने के दूसरे रविवार को हम 'वाचन पुनर्वाचन' शृंखला प्रकाशित करते हैं। 'वाचन पुनर्वाचन' शृंखला की तेरहवीं कड़ी के अन्तर्गत हम इस बार आदित्य पाण्डेय की कविताएं प्रस्तुत कर रहे हैं। इस शृंखला में अब तक आप प्रज्वल चतुर्वेदी, पूजा कुमारी, सबिता एकांशी, केतन यादव, प्रियंका यादव, पूर्णिमा साहू, आशुतोष प...