लुत्फा हानूम सेलिमा बेगम की असमिया कविताएं
लुत्फा हानूम सेलिमा बेगम गम्भीरता से देखा जाए तो हर कवि का कविता लिखने का अपना अलग तरीका होता है। कवि की संवेदनशीलता, समझ, सूक्ष्म दृष्टि, विषय को बरतने का तरीका जैसे कई एक ऐसे कारक होते हैं जो एक कवि को और कवियों से अलग करता है। मनुष्य प्रकृति से ही सामूहिक होता है। हालांकि तमाम ऐसे काम होते हैं जिसे वह अकेले निबटा लेता है। हानूम सेलिमा बेगम अपनी एक कविता में लिखती हैं एक कप चाय अकेले पी जा सकती है। उसी तरह से तमाम और काम भी अकेले किए जा सकते हैं ' पैदल टहला जा सकता है/ किताब की दुकान तक जाया जा सकता है/ खरीददारी की जा सकती है/ मंदिर-मजार तक भी जाया जा सकता है अकेले/ ... श्मशान यात्रा ही नहीं की जा सकती अकेले/ ले जाना होगा चार लोगों को मिल कर'। दुःख की घड़ी में मनुष्य के लिए सामूहिकता बहुत जरूरी होती है। सामूहिकता के बल पर ही हम किसी प्रिय जन के बिछोह से ऊबर पाते हैं। कवयित्री लुत्फा हानूम सेलिमा बेगम असमिया कविता के क्षेत्र में अपनी अलग ढर्रे वाली कविताओं के लिए ख्यात हैं। असमिया कविता में उनका एक विशिष्ट स्थान है। उनके सात कविता...