संदेश

योगिता यादव लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

योगिता यादव की कहानी

चित्र
योगिता यादव  धर्म-कर्म और धर्म-कर्म के रीति-रिवाज सब कुछ एक अलग वातावरण तैयार करते हैं । मसला चूंकि धर्म का होता है इसलिए आस्था से खिलवाड़ धर्म बर्दाश्त नहीं कर पाता । वैसे धर्म तर्क को भी कहाँ बर्दाश्त कर पाता है? यह दुनिया आज अगर इतनी उन्नत, आधुनिक और विकसित दिख रही है तो उसमें इस तर्क की एक बड़ी भूमिका है ।  लेकिन एक अजीब सी विडम्बना है कि इस धर्म कर्म को उसकी तमाम रुढियों के साथ आगे बढाने का दायित्व स्त्रियाँ निभातीं हैं । उनसे इस बात की उम्मीद भी की जाती है । यह अलग बात है कि प्रायः हर धर्म का नजरिया स्त्रियों के प्रति संकीर्ण दिखाई पड़ता है ।वह लड़की जो एक प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान से पत्रकारिता की हुई है और इसे अपना कैरियर बनाना चाहती है, अन्ततः एक गृहिणी में तब्दील हो धर्म-कर्म निभाने के लिए गाँव चली जाती है । योगिता यादव अपनी कहानी 'शहर सो गया था' में इन विडम्बनाओं को करीने से पिरोने का हुनर जानती हैं ।वे खुद भी एक पत्रकार हैं और तमाम मोर्चों पर अपने काम कर रही हैं । इन मोर्चों से मिले जमीनी अनुभव उनकी कहानियों के विषय बन जाते हैं । किसी भी कहानीकार के लिए इस तरह की स...