अखिलेश कुमार शंखधर का आलेख 'मणिपुर की ‘महिप पत्रिका’ का साहित्यिक अवदान'
किसी भी साहित्यिक पत्रिका का मुख्य उद्देश्य साहित्य की श्रेष्ठ रचनाओं को प्रकाशित करने के साथ साथ स्थानीय रचनाशीलता को बढ़ावा देना भी होता है। गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों से हिन्दी की साहित्यिक पत्रिका निकलना तमाम चुनौतियों से भरा होता है। लेकिन कुछ पत्रिकाओं ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए हिन्दी साहित्य की दुनिया में बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। महिप ऐसी ही पत्रिका है जिसका प्रकाशन मणिपुर की प्रतिष्ठित स्वैच्छिक हिंदी संस्था ‘मणिपुर हिंदी परिषद्’ द्वारा किया जाता है। अखिलेश शंखधर लिखते हैं - " ‘महिप पत्रिका’ ने हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवियों और रचनाकारों पर बेहतरीन सामग्री तो प्रस्तुत की ही है, साथ ही इस पत्रिका ने अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य से हिंदी के पाठकों को परिचित कराने के उद्देश्य से ही मणिपुरी के अनेक रचनाकारों पर केंद्रित अंक निकाले हैं। साथ ही साथ मणिपुरी और अन्य भारतीय भाषाओं के विभिन्न रचनाकारों की रचनाओं को भी पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। महिप पत्रिका ने आरंभ से ही मणिपुरी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में रचित साहित्य को अनुवाद के माध्यम से व्यापक पाठक जगत् के सम...