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निलय उपाध्याय का यात्रा संस्मरण 'हरिद्वार : गंगा का सबसे पुराना बाजार है'

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कवि निलय उपाध्याय पिछले वर्ष गंगा यात्रा पर थे। गंगोत्री से गंगासागर की यह पूरी यात्रा उन्होंने सायकिल से पूरी की। निलय उपाध्याय ने इस यात्रा को अब शब्दों में ढालना शुरू किया है। अनहद-5 में हरिद्वार के संदर्भ में लिखा गया उनका यह संमरण पाठकों के बीच काफी सराहा जा रहा है। इस संस्मरण में निलय ने सत्ता, धर्म और पूंजीपतियों के गठबंधन पर एक नजर डाली है। गंगा जिसे हम माँ कहते नहीं अघाते, हमारे विकृत सोच के चलते मृतप्राय हो चली है।  गंगा की इस दुर्गति और हकीकत जानने के लिए पढ़िए निलय उपाध्याय का यह महत्वपूर्ण संस्मरण।           हरिद्वार : गंगा का सबसे पुराना बाजार है निलय उपाध्याय इतिहास के मुख्य दवार परखडे एक आदमी ने , जो वर्तमान था मुझे रोक कर पूछा- गंगा चाहिए लेना हो तो जल्दी बोलो बहुत कम बची है ? मैं जहा खड़ा था बहुत खूबसूरत बाजार था चारो ओर सजी थी दुकाने इतिहास की , धर्म की , संस्कृति की और जाने कितनी दुकाने सबसे बडी थी दुकान वहां अपराध की उसके बराबर थी धर्म की सुना दोनों का मालिक एक है कोई कान...