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कुमार अंबुज की कविताएँ

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कुमार अंबुज कविता की दुनिया में कुछ कवि ऐसे हैं जिनका लिखा काफी कुछ अपना लगता है। पढ़ने गुनने का मन होता है। जो सत्ता की चाटुकारिता करता है वह भांड होता है। जो सत्ता की आलोचना करता है वह कवि होता है। कवि तो बेखौफ होता है। वह बेखौफ लिखते हुए ही अच्छा लगता है। आज के दौर में जब मीडिया के साथ साथ साहित्य भी सत्ता का पिछलग्गू बन चुका है, कुमार अंबुज बेखौफ कविताएँ लिख रहे हैं। लगातार लिख रहे हैं।  आज उनका जन्मदिन है।  प्रिय कवि को जन्मदिन की बधाइयाँ व ढेर सारी शुभकामनाएँ!  आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं कुमार अंबुज की कविताएँ।  कुमार अंबुज की कविताएँ एक ही प्रेम  एक प्रेम काफ़ी है ज़िन्दा रहने के लिए  एक ही प्रेम नष्ट होने के लिए  पर्याप्त है एक प्रेम का दंड एक का ही वरदान कर देता है धन्य  एक प्रेम की निराशा फैल जाती है दूर तक और वही थाम लेता है आशा का चिथड़ा  एक प्रेम से ऊब पैदा होती है, उसी से तृप्ति एक प्रेम सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए  वही काफ़ी है रात में चाँद सितारों के वास्ते एक प्रेम की व्यग्रता हो सकती है बर्दाश्त सँभाली जा सकती है बस ...

अरुण देव द्वारा कुमार अंबुज की चयनित 75 कविताओं पर समीक्षा 'असंभव का संभव प्रयास'

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कुमार अंबुज  आमतौर पर कवियों के कविता संग्रह से हम उसकी सोच और संवेदनाओं से परिचित होते हैं। लेकिन जब बात कवि की  चयनित कविताओं के संग्रह की हो, तो अभिप्राय बदल जाते हैं। संकलनकर्ता को कविताएं संकलित करते समय हमेशा सजग और सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि उसके सामने कवि की श्रेष्ठतम कविताएं प्रस्तुत करने की चुनौती होती है। यह  चुनौती तब और कठिन हो जाती है जब बेहतरीन कविता लिखने वाले कवि का चयनित संग्रह तैयार करना हो। कुमार अंबुज हमारे समय के उम्दा कवि हैं। अरुण देव ने उनकी पचहत्तर कविताओं का एक संकलन तैयार किया है। अरुण खुद भी कवि हैं। कविता के मर्म को अच्छी तरह जानते पहचानते हैं।  कुमार अंबुज की कविताएं संकलित करते समय उनका यह हुनर काम आया है और उन्होंने कविताओं का बेहतरीन चयन किया है। इस संकलन पर एक नज़र डाली है कवि यतीश कुमार ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अरुण देव द्वारा कुमार अंबुज की चयनित 75 कविताओं पर समीक्षा 'असंभव का संभव प्रयास'। असंभव का संभव प्रयास  (75 कविताएँ - कुमार अम्बुज) कविताओं का चयन- अरुण देव  यतीश कुमार कविता संग्रह पर अपनी बात...

कुमार अम्बुज की किताब थलचर की यतीश कुमार द्वारा की गई समीक्षा ' लेखक सदैव ही टूटता हुआ तारा है।'

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  कवि का गद्य अपने आप में अनूठा होता है। काव्य की आभा लिए हुए गद्य, जिसे पढ़ते हुए कविता की धारा में ही बहने का अहसास होता है। कुमार अंबुज हमारे समय के ऐसे ही महत्त्वपूर्ण कवि हैं, जिन्होंने सिर्फ कविताएँ ही नहीं कहानियां और ललित निबन्ध सरीखे और भी गद्य भी लिखे हैं। उनकी गद्य की एक महत्त्वपूर्ण किताब है 'थलचर'। युवा कवि यतीश कुमार ने थलचर को पढ़ते हुए समीक्षा लिखी है। इसे सिर्फ समीक्षा कहना भी अनुचित होगा। किताब के बहाने से यतीश का मौलिक गद्य भी इसमें अपनी भरपूर उपस्थिति के साथ है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है कुमार अंबुज की किताब 'थलचर' पर यतीश कुमार की आलेखात्मक समीक्षा ' लेखक सदैव ही टूटता हुआ तारा है। ' लेखक सदैव ही टूटता हुआ तारा है   यतीश कुमार इस किताब को छूते ही मैं थोड़ा सा कृष्ण नाथ से, थोड़ा विनोद कुमार शुक्ल से और फिर रुक कर स्वदेश दीपक से मिला।  कोई भी कविमना जब भी एकांत में होगा कुछ ऐसी ही आत्म उक्तियों से रु ब रु होगा। थोड़ा खुद को खोएगा थोड़ा खुद को पायेगा।  हे मन तू चल अब कुमार अम्बुज की सुन और सुन कि तुझे अभी कितना कुछ सीखना है इस ख़ुदरंग से। देख रहा...