संदेश

शंकरानंद लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शंकरानंद की कविताएं

चित्र
  शंकरानन्द  पेड़ पौधे हमारे जैविक पुरखे हैं। इनके साथ मनुष्य का सम्बन्ध इतना घनिष्ठ है कि इनके बिना हम जीवन की परिकल्पना तक नहीं कर सकते। हमारी पृथिवी को अगर नीला ग्रह कहा जाता है तो इसमें इन पेड़ पौधों की बड़ी भूमिका है। इनका आवास जंगल रहा है। हम मनुष्यों ने इन जंगलों को साफ कर ही अपना घर बनाया है और अपनी खेती बारी सजाई है। यानी कि हमने जबरन इनके घरों पर कब्जा जमा लिया है। विकास की दौड़ में हम लगातार जंगलों और पेड़ पौधों का अंधाधुंध सफाया करते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों ने अन्य ग्रहों के बारे में अनुमान लगाते हुए यह बताया है कि फलां ग्रह पर सोने की बारिश होती है, फलां ग्रह पर हीरे के समुद्र बहते हैं, फलां ग्रह पर लोहे का अकूत भण्डार है। लेकिन आज तक वे एक भी ऐसा ग्रह नहीं खोज पाए हैं जिस पर लकड़ी यानी पेड़ पौधे या कोई तृण होने के साक्ष्य मिले हों। आज जंगलों को जैसे लूटा जा रहा हो। बिना इस बात की परवाह किए कि इन जंगलों के उजड़ने पर बहुत से पशु पक्षियों का आशियाना उजड़ जाता है। जंगल के मूल निवासी बेघरबार हो जाते हैं। कवि  शंकरानन्द लिखते हैं : 'जंगल सिर्फ पेड़ों का खजाना नहीं...

शंकरानंद की कविताएं

चित्र
  शंकरानंद शंकरानंद परिचय जन्म- 8 अक्टूबर 1983 को खगडिया जिले के एक गाँव हरिपुर में। शिक्षा -एम. ए. (हिन्दी), बी. एड. प्रकाशन- कथादेश, आजकल, आलोचना, हंस, वाक्, पाखी, वागर्थ, वसुधा, नया ज्ञानोदय, सरस्वती, कथाक्रम, परिकथा, पक्षधर, वर्तमान साहित्य, कथन, उद्भावना,  बया, नया पथ, लमही, सदानीरा, साखी, समकालीन भारतीय साहित्य, मधुमती, इंदप्रस्थ भारती, पूर्वग्रह, मगध, कविता विहान, नई धारा, आउटलुक, दोआबा, बहुवचन, अहा जिन्दगी, बहुमत, बनास जन, निकट, जनसत्ता, विश्वरंग कविता विशेषांक, पुस्तकनामा साहित्य वार्षिकी, स्वाधीनता शारदीय विशेषांक, आज की जनधारा वार्षिकी, कथारंग वार्षिकी, सब लोग, संडे नवजीवन, दैनिक जागरण, नई दुनिया, दैनिक भास्कर, जनसंदेश टाइम्स, जनतंत्र, हरिभूमि, प्रभात खबर दीपावली विशेषांक, शुभम सन्देश, नवभारत आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। कुछ में कहानियां भी। पिता, बच्चे, किसान और कोरोना काल की कविताओं सहित कई महत्वपूर्ण और चर्चित संकलनों के साथ 'छठा युवा द्वादश' और 'समकालीन कविता' में कविताएं शामिल। हिन्दवी, समालोचन, इन्द्रधनुष, अनुनाद, समकालीन जनमत, हिंदीसमय, समत...

शंकरानंद

चित्र
जन्म- 08 अक्टूबर 1983     शिक्षा: हिन्दी में एम 0 ए 0 । नया ज्ञानोदय , वर्तमान साहित्य   वसुधा , वागर्थ , कथन , बया , परिकथा आदि पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित।        भारतीय  भाषा परिषद् कोलकाता से पहला कविता संग्रह  'दूसरे दिन के लिए'  अभी हाल ही में प्रकाशित   युवा कवियों में शंकरानंद ने अपने कथ्य और शिल्प के बल पर अपनी अलग पहचान बनायी है. इनकी छोटी-छोटी कविताएँ सहज ही हमारा ध्यान आकृष्ट करती हैं. आज जब पूंजीवादी ताकतें आम आदमी का सुख-चैन ही नहीं उसका आने वाला कल भी पूरी तरह अपनी मुट्ठी में कर लेना चाहती हैं. खेती-किसानी के लिए ऐसा बीज ला रहीं हैं जो अगले साल अंकुरित ही न हो और किसान को बाजार की बाट जोहनी पड़े ऐसे कठिन समय में यह कवि उस बीज को बचा लेने के लिए प्रतिबद्ध है जो उसके लिए एकमात्र पूँजी और जीवन है. तो आईये पढ़ते हैं संभावनाओ से भरे हुए इस कवि की अभी हाल ही में लिखी गयी कविताएँ.           अगर        ऊँघने लगूँ तो ...