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पौमिला ठाकुर के उपन्यास 'नायिका' की रुचि बहुगुणा उनियाल द्वारा की गई समीक्षा

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  कविता, कहानी हो या उपन्यास जैसी कोई रचना, कल्पना की उड़ान होते हुए भी इनमें जीवन और समाज का वह सच दर्ज होता है जिसे इतिहास दर्ज करने से कहीं न कहीं चूक जाता है। यह एक कटु यथार्थ है कि आधी आबादी होने के बावजूद स्त्रियां जाने अंजाने कहीं न कहीं पुरुषों के उत्पीड़न का शिकार होती रही हैं। और बात पहाड़ी स्त्रियों की हो तब यह उत्पीड़न एक भयावह सच्चाई के रूप में सामने आता है। पौमिला ठाकुर ने अपने उपन्यास नायिका के माध्यम से पहाड़ी स्त्रियों के दर्द को दर्ज करने की सफल कोशिश की है। इस उपन्यास की एक समीक्षा लिखी है कवयित्री रुचि बहुगुणा उनियाल ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  पौमिला ठाकुर के उपन्यास 'नायिका' की  रुचि बहुगुणा उनियाल द्वारा की गई समीक्षा  'पहाड़ी महिलाओं के पीड़ा की अकथ कहानी'। 'पहाड़ी महिलाओं के पीड़ा की अकथ कहानी' रुचि बहुगुणा उनियाल                               आप किताब पढ़ते हुए क्या चीज़ ढूँढते हैं, यही न कि शुद्ध रूप से साहित्य के साथ रोचकता भी भरपूर मिले, ...