शैलेन्द्र कुमार शुक्ल की कविताएं
शैलेन्द्र कुमार शुक्ल समय के अनुसार प्रतिमान बदलते रहते हैं। यह जरूरी नहीं कि जहां बेहतर चल रहा हो वहां बदतर घटित नहीं हो सकता। कहा जा सकता है कि समय का भी प्रति समय होता है। आज जो सत्ता में प्रतिष्ठित हैं उनके प्रतिमान बिलकुल अलग हैं। यह बात सबको पता है कि गांधी जी ने राष्ट्रीय आन्दोलन का नेतृत्व किया। लेकिन यह दुखद है कि आज उन लोगों को प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया जा रहा है जिन्होंने न केवल गांधी जी की हत्या की बल्कि उनके सिद्धांतों और आदर्शों की हत्या कर दी। कवि शैलेन्द्र कुमार शुक्ल अपने ढब के कवि हैं। उन्होंने कविता की छन्दात्मकता को बचाए रखने का प्रयास किया है। शैलेन्द्र वर्तमान स्थितियों से आक्रोशित होते हुए लिखते हैं : 'एक हत्यारे की सहज मृत्यु से भयावह/ क्या हो सकता है महाराज!/ यह उत्तर सत्य का जमाना है/ सूचनाओं में गुम होता एक हत्यारा/ क्या अब सिर्फ विभत्स श्रद्धांजलि/ का हकदार रह गया/ अपने मुंह पर थूको/ नहीं थूक सकते तो/ शर्म को शर्मसार करो।' शैलेन्द्र ने हिंदी कविताओं के साथ-साथ अपनी बोली अवधी में भी उम्दा कविताएं लिखी हैं। आज पहली बार पर हम उनकी कुछ हिंदी कवि...