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गरिमा श्रीवास्तव के उपन्यास पर सुप्रिया पाठक की समीक्षा 'आउशवित्ज़: प्रेम के एकाकीपन का सामूहिक कोरस'

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द्वितीय विश्वयुद्ध अभी तक के मानव इतिहास सबसे त्रासद युद्ध माना जाता है। इस युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने यहूदियों का भीषण नरसंहार किया। उन्हें गैस चैम्बर में डाल कर मार डाला गया।   आउशवित्ज़ (Auschwitz) द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी द्वारा स्थापित सबसे बड़ा और कुख्यात एकाग्रता एवं नरसंहार शिविर (Concentration and Extermination Camp) था। यह नाज़ी-अधिकृत पोलैंड के ओस्विसीम (Oświęcim) शहर में स्थित था। इस शिविर का संचालन 1940 से 1945 के बीच किया गया। एक अनुमान के आधार पर यहाँ 11 लाख से अधिक लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई, जिनमें अधिकांश यहूदी थे। इसके अलावा पोलिश लोग, रोमा (जिप्सी), और सोवियत युद्धबंदी भी शामिल थे।  गरिमा श्रीवास्तव का उपन्यास 'आउशवित्ज़: एक प्रेम कथा'  मानव इतिहास के एक क्रूरतम कालखंड यानी द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान स्त्रियों के साथ हुई हिंसा की परत-दर-परत पड़ताल है। हिन्दी में युद्ध के दौरान स्त्री हिंसा पर गिनी चुनी रचनाएँ ही आईं हैं और यह उपन्यास इस कमी को अंशत: पूरा करता है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि  युद्ध का सबसे ...

गरिमा श्रीवास्तव से प्रज्ञा की बातचीत

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गरिमा श्रीवास्तव  दक्षिण-पश्चिम पोलैंड स्थित ऑशविट्ज़ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन कब्जे में था। यहां की सोलह जर्जर और निर्जन इमारतों को देखने के पश्चात नाज़ी अधिकारियों ने एक जेल बनाने की योजना बनाई। जिस कस्बे में यह स्थित था, उसका नाम ओस्विसीम या ऑशविट्ज़ था। ओस्विसीम के यहूदी निवासियों को मजबूरन परित्यक्त बैरकों का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण कर के ऑशविट्ज़ प्रथम नामक जेल बनानी पड़ी, जिसमें युद्धबंदियों को रखा जाना था। इनमें से पहले युद्धबंदियों का आगमन मई 1940 में शुरू हुआ। यूरोप भर से यहूदियों और तृतीय रीख के दुश्मनों को जैसे-जैसे निर्वासित किया गया, शिविर की आबादी बढ़ती चली गई। कांटेदार तारों की बाड़ और निगरानी मीनारों से घिरे ऑशविट्ज़ यातना शिविर के काले द्वारों के ऊपर 'Arbeit macht frei' ('काम आपको आज़ाद करता है') लिखा हुआ था। इस शिविर में लगभग ग्यारह लाख लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई।  गरिमा श्रीवास्तव ने अपने उपन्यास "आउशवित्ज़ : एक प्रेम कथा" में बेहद त्रासद और कारूणिक स्थितियों का चित्रण किया है। हालांकि आउशवित्ज़ यातना का प्रतीक है लेकिन उसे ...