पंकज मित्र के कहानी संग्रह ‘वाशिंदा @ तीसरी दुनिया’ पर जगन्नाथ दुबे की समीक्षा 'कस्बाई जीवन यथार्थ की कहानियां'
पंकज मित्र पंकज मित्र हमारे समय के चर्चित कथाकार हैं । हाल ही में इनका एक कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ है ‘वाशिंदा @ तीसरी दुनिया’ । इस संग्रह पर समीक्षा लिखी है युवा आलोचक जगन्नाथ दुबे ने । जगन्नाथ ने संग्रह की कहानियों पर तरतीबवार बात की है । यह समीक्षा 'तद्भव' के हालिया अंक में प्रकाशित हुई है । उस समीक्षा का संशोधित रूप 'पहलीबार' पर आप सब के लिए प्रस्तुत है । कस्बाई जीवन यथार्थ की कहानियां जगन्नाथ दुबे ‘वाशिंदा @ तीसरी दुनिया’ हिन्दी के विशिष्ट कथाकार और गंवई कस्बाई चेतना के वाहक पंकज मित्र का चौथा कहानी संग्रह है। इससे पहले पंकज जी के तीन कहानी संग्रह 'क्विजमास्टर', 'हुडुकलुल्लू' और 'जिद्दी रेडियो' नाम से प्रकाशित हो चुके हैं। आज जबकि कहानी को लेकर तमाम तरह की बहसें हिन्दी आलोचना में चल रही हैं। कहानी की सार्थकता उसके कहानीपन और उसके सरोकार जैसे मूल मुद्दे पर गंभीरता से विचार न करके कहानी से सवाल किया जा रहा है कि उससे क्रांति क्यों नहीं हो रही है? कहानी जैसी शसक्त विधा जिसे नामवर जी ने...