सआदत हसन मंटो की कहानी 'टोबा टेकसिंह'
सआदत हसन मंटो भारत का विभाजन बीसवीं शताब्दी की एक बड़ी त्रासदी थी। धर्म के आधार पर यह विभाजन जरूर हुआ लेेकिन ऐसे भी तमाम लोग थे, जो जमीनी जुड़ाव के कारण अपनी मूल जगहों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए। इस समय लोगों के दिलो दिमाग में एक अजीब सा पागलपन तारी था। विभाजन के पश्चात आबादी का व्यापक पैमाने पर ट्रांसफर हुआ। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों के मुसलमान उस अपरिचित से जगह के लिए चल पड़े, जो अब पाकिस्तान कहा जा रहा था। पाकिस्तान की तरफ के हिन्दू और सिख उस भारत की तरफ चल पड़े जहां उनका न कोई परिचित था, न ही कोई रिश्तेदार। दोनों तरफ शरणार्थियों की समस्या उठ खड़ी हुई। विभाजन की इस त्रासदी को सआदत हसन मंटो ने अपनी मशहूर कहानी 'टोबा टेकसिंह' में शिद्दत के साथ उकेरा है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं सआदत हसन मंटो की कहानी 'टोबा टेकसिंह'। 'टोबा टेकसिंह' सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि अख्लाकी कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मुसलमान पागल हि...