भारत भूषण जोशी की कहानी 'गौरदा'
भारत भूषण जोशी संस्कृति मनुष्य को जोड़ने में एक बड़ी भूमिका अदा करती आयी है । हमारे यहाँ धर्म भी इस संस्कृति का अटूट हिस्सा रहा है । यह अटूट पना कुछ इस प्रकार का है कि एक दूसरे को अलगा कर इन्हें जाना और समझा ही नहीं जा सकता । धर्म जिसके अंतर्गत तीज , त्यौहार, परम्पराएँ एक दूसरे से आबद्ध दिखायी पड़ती हैं । इनमें भी हिन्दू तीज-त्यौहारों से जुड़े हैं - लोक गीत, लोक-नृत्य, लोक- नाट्य जैसे राम लीला और रास-लीला । होली के अवसर पर गाये जाने वाले फाग को आधार बना कर भा रत भूषण जोशी ने एक उम्दा कहानी लिखी है 'गौर दा' । जोशी जी इलाहाबाद में ही रहते हैं और पहली बार पर यह उनकी पहली कहानी है । आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं भारत भूषण जोशी की यह कहानी । गौरदा भारत भूषण जोशी फाग का महीना चल रहा था। ठण्ड अभी दिल्ली में पाँव पसारे थी। सुबह शाम मजे़ की सिहरन हो जाती थी। गरम कपड़े छूटे न थे। बसंत के आगमन की सूचना झड़ते पत्तों से मिलने लगी थी। हरीश जोशी दफ़्तर से निकल कर सीधे आई. टी. ओ. के मुख्य बस स्टॉप पर आता है। उसकी कलाई घड़ी शाम के पौने छः बजा...