माधव चतुर्वेदी की कहानी 'महापात्र का एजेंट'
माधव चतुर्वेदी किसी भी रचनाकार के लिए दृष्टि सम्पन्नता बहुत जरुरी होती है । रसूल हमजातोव ने अपनी प्रख्यात किताब 'मेरा दागिस्तान' में एक जगह लिखा है - 'यह मत कहो कि मुझे विषय दो । बल्कि यह कहो कि मुझे दृष्टि दो ।' जो रचनाकार अपने आस-पास के समूचे दृश्य-परिदृश्य को सजग-सचेत दृष्टि से देखते हैं वही बेहतर सृजन कर पाते हैं । माधव चतुर्वेदी एक पत्रकार होने के साथ-साथ उम्दा कहानीकार भी हैं । माधव जी मीडिया जगत की विडम्बनाओं से अच्छी तरह परिचित हैं । यह वही मीडिया है जो दूर से चकाचौंध भरी लगती है । तो आज आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं - माधव चतुर्वेदी की कहानी 'महापात्र का एजेंट ' । महापात्र का एजेंट माधव चतुर्वेदी चीफ रिपोर्टर का काम बड़ा किचाइन होता है। शहर में कुछ भी हो जाए , ... मुसीबत चीफ रिपोर्टर की। हर बात का जवाब दो। यह साला सम्पादक भी.....दिनों-दिन सठिया जा रहा है। कल मकरानपुर की सड़क धंस जाने की इतनी बड़ी खबर देर से देने के कारण भड़क गया। कह रहा था , ‘‘ आप की वजह से डेड लाइन मिस कर गये। आप जानते हैं कि शेड्यूल से ...