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आशीष कुमार का आलेख मकतब-ए-इश्क का दस्तूर निराला देखा'।

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  अमिताभ बच्चन   अमिताभ बच्चन जीते जी भारतीय सिनेमा की किंवदंती बन चुके हैं। अमिताभ अब सत्तर के दशक में प्रवेश कर चुके हैं लेकिन उनके अभिनय के इतने शेड्स हैं जिसे ले कर तमाम बातें की जाती हैं। उनमें प्रयोग का साहस है। ' निःशब्द ' और ' चीनी कम ' दो ऐसी फिल्में हैं जो अलग अलग कथानक के साथ प्रस्तुत की गई हैं। अभिनय के नज़रिए से इन दोनों फिल्मों में अमिताभ शिखर पर हैं। फ़िल्म आलोचक आशीष कुमार ने इन फिल्मों को केन्द्र में रख कर एक आलेख लिखा है ' मकतब - ए - इश्क का दस्तूर निराला देखा ' । आशीष के लेखन में एक गंभीरता स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। आज अमिताभ का जन्मदिन है। अमिताभ को जन्मदिन की बधाई देते हुए आज हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं आशीष कुमार का आलेख मकतब - ए - इश्क का दस्तूर निराला देखा ' ।     मकतब - ए - इश्क़ का दस्तूर निराला देखा ...!*   --------------------------------------------------------------- ( सिनेमा मे...