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सुनील श्रीवास्तव की कहानी 'डॉग बाइट'

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सुनील श्रीवास्तव की पहली कहानी है 'डाग बाईट।' पहली कहानी होने के बावजूद यह अपने शिल्प और गठन में पर्याप्त चुस्त-दुरुस्त है. नौकरशाही का यह तन्त्र हर स्तर पर कितना भ्रष्ट हो चुका है इसकी एक बानगी यहाँ सहज ही दिखायी पड़ती है. इस व्यवस्था में काम करने वाले कुछ ईमानदार लोग किस तरह की विकट परिस्थिति का सामना करते हैं यही इस कहानी का कथ्य है जिसे सुनील ने कर्मचारी अजय के व्यक्तिगत एवं पारिवारिक जीवन के ताने-बाने के माध्यम से और धारदार बना दिया है. उस कर्मचारी के मोबाईल की रिंग टोन 'सब कुछ सीखा हमने, न सीखी होशियारी' भी उस आदमी का परिचय करीने से बता देती है. एक उच्च अधिकारी किस तरह अपने मातहतों को अपनी हनक दिखाते हुए अपने ड्राईवर के बच्चे के कुत्ते काटने के इंजेक्शन लगाने को ले कर पूरा अस्त-व्यस्त कर देता है. जबकि हकीकत यह होती है कि वह कर्मचारी छुट्टी पाने के लिए अपने अधिकारी से कुत्ते के काटने का बहाना करता है. और वह अधिकारी उस कर्मचारी के शब्दों में ही कहें तो सच्चाई जानने के लिए पूरा स्वांग रच देता है. कहानी अन्त तक जाते-जाते एक व्यंग्य बोध में तब्दील होती हुई हमा...