नवारुण भट्टाचार्य की कविताएँ (अनुवाद - मीता दास)
नवारुण भट्टाचार्य दुनिया का कोई भी रचनाकार जीवन के पक्ष में ही खड़ा होता है. इस पक्ष में खड़े होना आसान नहीं होता. इस क्रम में उसे अपने समय की शोषक शक्तियों के खिलाफ खड़ा होना होता है. उसे प्रायः उस सत्ता के खिलाफ खड़ा होना होता है जिसका चरित्र आम तौर पर जन विरोधी होता है. बांग्ला कवि नवारुण भट्टाचार्य अपनी रचनाओं ही नहीं अपने जीवन में भी 'जीवन के पक्ष में' लगातार खड़े रहे. नवारुण की बांग्ला कविताओं का हिन्दी अनुवाद किया है चर्चित कवयित्री मीता दास ने. तो आइए आज पढ़ते हैं नवारुण भट्टाचार्य की कविताएँ. नवारुण भट्टाचार्य की अनुदित कविताएँ अनुवाद - मीता दास तितली बरनी के भीतर तितलियाँ हैं एक मुट्ठी तितलियां मुझे देना खरीद हथेलियों में चिपके रहेंगे रेणु की तरह और देह रंगा रहेगा रंगों से म्यूजियम में देखा था मरी हुई तितलियाँ और याद करता हूँ ऐसा ...