हरबंस मुखिया की नज़्में
हरबंस मुखिया उम्मीद जिस पर सब कुछ कायम है , खुद में इतना अमूर्त है कि उसे पहचान पाना खासा मुश्किल होता है। फिर भी उम्मीद है कि कायम है। घोर निराशा के क्षणों में भी उम्मीद जीवन्तता बनाए रखती है। हरबंस मुखिया की ख्याति एक मशहूर इतिहासकार के रूप में है। कम लोगों को यह पता होगा कि वे खूबसूरत नज़्में भी लिखते रहे हैं। एक जमाने में उर्दू की मशहूर पत्रिका शब ख़ू में शमशुर्रहमान फ़ारूक़ी ने हरबंस जी की नज़्मों को प्रकाशित किया था। हमारे अनुरोध पर उन्होंने अपनी नज़्मों को देवनागरी में रूपांतरित कर पहली बार के लिए भेजा है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं हरबंस मुखिया की नज़्में। हरबंस मुखिया की नज़्में उम्मीद और वक़्त मैं ने महज़ एक ज़िन्दगी के दायरे में उम्मीद को समेट लेना चाहा उम्मीद जिस के धागे वक़्त से बंधे थे ...