विजेन्द्र जी के कुछ पत्र, प्रस्तुति : विनोद दास
वरिष्ठ और नए रचनाकारों के बीच सम्पर्क के सिलसिले हिन्दी साहित्य में बहुतायत हैं। सम्पर्क के इस क्रम से दोनों समृद्ध होते रहे हैं। विजेंद्र जी का नाम ऐसे वरिष्ठ रचनाकारों में शुमार है जो बड़ी सहजता से नई पीढ़ी के साथ न केवल जुड़ जाते थे, बल्कि प्रोत्साहित भी करते रहते थे। वे नए रचनाकारों को बराबर पत्र भी लिखते रहते थे। इन पत्रों से हमें न केवल साहित्य बल्कि साहित्येत्तर जानकारियां भी मिलती हैं। शायद ही कोई नया रचनाकार हो, जिसके पास विजेन्द्र जी के कुछ पत्र न हों। कवि विनोद दास के साथ विजेन्द्र जी का लम्बा पत्र व्यवहार चला। इनमें से कुछ पत्रों को विनोद जी ने आज भी सहेज कर रखा है। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं विजेन्द्र जी के वे पत्र जो उन्होंने विनोद दास को लिखे थे। विजेन्द्र जी के कुछ पत्र प्रस्तुति : विनोद दास विजेन्द्र जी की कविता से परिचय उनका काव्य संग्रह “चैत की लाल टहनी” पढ़ने के बाद हुआ था। विजेन्द्र जी की कविताएँ प्रचलित, स्वीकृत और तयशुदा मुहावरों से अलग लगी थीं। उनकी कविताएं शहरी दृष्टि से विपरीत लोकजीवन का प्रति संसार रच रही थीं। उन दिनों...