सात्विक श्रीवास्तव की कविताएँ
सात्विक श्रीवास्तव दुनिया के हर पिता की यह हसरत होती है कि उसकी सन्तान बेहतर जीवन जिए। वह इसके लिए हर सम्भव प्रयास भी करता है। लेकिन उसकी चाहतों के आड़े आता है अभाव। ऐसे में पिता का दुखी होना स्वाभाविक है। सात्विक श्रीवास्तव पिता को इस तकलीफ को अपनी कविता में रेखांकित करते हैं। कोई दो राय नहीं कि सात्विक के पास एक सजग कवि दृष्टि है। लेकिन भाषा के स्तर पर उन्हें अभी और काम करने की आवश्यकता है। 'वाचन पुनर्वाचन' शृंखला की यह नवीं कड़ी है जिसके अन्तर्गत सात्विक श्रीवास्तव की कविताएं प्रस्तुत की जा रही हैं। इस शृंखला में अब तक हम प्रज्वल चतुर्वेदी, पूजा कुमारी, सबिता एकांशी, केतन यादव, प्रियंका यादव, पूर्णिमा साहू, आशुतोष प्रसिद्ध, और हर्षिता त्रिपाठी की कविताएं पढ़ चुके हैं। ' वाचन पुनर्वाचन' शृंखला के संयोजक हैं प्रदीप्त प्रीत। कवि बसन्त त्रिपाठी की इस शृंखला को प्रस्तुत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। कवि नासिर अहमद सिकन्दर ने इन कवियों को रेखांकित करने का गुरुत्तर दायित्व संभाल रखा है। तो आइए इस कड़ी में पहली बार पर हम पढ़ते हैं सात्विक श्रीवास्तव...