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हसन नासर की कहानी 'भोज' प्रस्तुति : यादवेन्द्र

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आमतौर पर सत्ता का चरित्र यही होता है कि जनता की बात करते हुए भी जनता से उसका कुछ खास लेना देना नहीं होता. सत्ता का अपना एक अहंकार और मद भी होता है. कुर्सी पर बैठते ही सत्ताधीश खुद को औरों से ऊंचा समझने लगता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है ट्यूनीशिया के कहानीकार हसन नासर की एक सामयिक कहानी भोज. कहानी की प्रस्तुति यादवेन्द्र जी की है. तो आइए आज पहली बार पर पढते हैं यह कहानी.            अरबी कहानी                         भोज                                   हसन नासर (ट्यूनीशिया)   प्रस्तुति :   यादवेन्द्र   उस रात सुलतान के महल के    ऊपर चाँदनी नहीं छिटकी    और उसके चारों ओर फैला हुआ बाग़ सुनसान पड़ा रहा -- सुलतान अपने महल से गायब था। सुलतान की समूची ज़िन्दगी इसी महल के अन्दर गुजर गयी ,   सब कुछ तो इसी के अन्दर था - किसी भ...