कुमार मंगलम का आलेख 'आलोचना का स्वधर्म और उसके सांस्कृतिक महत्व की प्रतिष्ठा'
पुरुषोत्तम अग्रवाल वरिष्ठ आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल की ख्याति आमतौर पर मध्यकालीन चिन्तक के तौर पर रही है। लेकिन उनके नाम एक श्रेय और भी है। उन्होंने शिवदान सिंह चौहान की आलोचना की तरफ पहली बार साहित्यिक दुनिया का ध्यान आकृष्ट किया। इसी क्रम में उन्होंने साहित्य अकादमी के लिए भारतीय साहित्य के निर्माता के तहत शिवदान सिंह चौहान पर एक महत्त्वपूर्ण विनिबंध लिखा है। कुमार मंगलम ने पुरुषोत्तम अग्रवाल की आलोचकीय निर्मिति को उनके इसी विनिबंध शिवदान सिंह चौहान के द्वारा समझने की एक कोशिश की है। आज पुरुषोत्तम अग्रवाल का जन्मदिन है। उन्हें पहली बार की तरफ से जन्मदिन की बधाई एवम शुभकामनाएं। इस अवसर पर हम युवा कवि आलोचक कुमार मंगलम का एक आलेख प्रस्तुत कर रहे हैं। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं कुमार मंगलम का आलेख 'आलोचना का स्वधर्म और उसके सांस्कृतिक महत्व की प्रतिष्ठा'। 'आलोचना का स्वधर्म और उसके सांस्कृतिक महत्व की प्रतिष्ठा' (पुरुषोत्तम अग्रवाल की दृष्टि में शिवदान सिंह चौहान) कुमार मंगलम शिवदान सिंह चौहान हिंदी के ऐसे अकेले आलोचक हैं जिन पर पुरुषोत्तम ...