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इतैलो कैलविनो की इतालवी कहानी 'अनावृत उरोज' (हिंदी अनुवाद : सुशांत सुप्रिय)

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Italo Calvino इटली के कथाकार  इतैलो   कैलविनो की कहानी 'अनावृत्त उरोज' उस पुरुष की कहानी है, जो  सुनसान समुद्र - तट की रेत पर अनावृत उरोजों वाली एक युवती धूप सेंकती हुई युवती को देखने-न देखने के असमंजस में भरा हुआ है । दुनिया की कोई भी स्त्री यह नहीं चाहती कि  उसे इस स्थिति में कोई निहारे या फिर  उसकी इस निजी स्वतन्त्रता में दखल दे । प्रारम्भ में पालोमर महाशय इसे अपने लिए एक वर्जना की तरह लेते हैं लेकिन एक चतुर सुजान पुरुष की तरह ' युवती के नग्न धड़ की धुँधली कांस्य - गुलाबी रूप - रेखा देखते हैं ,   वे जल्दी से अपना सिर इस तरह मोड़ लेते हैं कि उनकी दृष्टि का कोण शून्य में लटका हुआ दिखे। इस तरह वे लोगों के गिर्द मौजूद अदृश्य सीमा के प्रति शिष्ट सम्मान की गारंटी देते हुए लगते हैं।' यह पालोमर का वह दुचित्तापन भी है जो आमतौर पर पुरुषों में दिखाई पड़ता है । खास बात यह कि पालोमर उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जो शुद्धतावाद के आग्रही हैं और इसे अविवेकपूर्ण मानते हैं । लेकिन तभी उन्हें उस उदारतावाद का ख्याल आता है जो स्त्री स्वतन्त्रताओं की बात करता है । इसी का ...