निशांत
प्रेम-और बेरोजगारी के कवि के रूप में काफी लोकप्रिय हुए थे। सत्ताईस साल की उम्र में कविता पर उन्हें प्रतिष्ठित भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। उनकी कविता की एक किताब जवान होते हुए लड़के का कुबुलनामा भारतीय ज्ञानपीठ से पिछले साल छप कर आयी है। निशांत की लंबी कविताओं का एक संग्रह जी हां, लिख रहा हूं राजकमल प्रकाशन से अभी-अभी छप कर आया है। निशांत प्रेम के कवि हैं। वह प्रेम जो किसी की परवाह नहीं करता और जो सदा अपनी खूबसूरती बरकरार रखता है। यह कवि अपने होने के अस्तित्व को समर्पित करता है – चाँद के दाग को। उस चाँद को जिसके पास सबसे खूबसूरत है उसके अपने गलत होने के निशान। यह कवि जीता है उस निशान के साथ ही जो उसके दांतों और होठो के स्वप्न में धड़कते हैं। पहली बार पर प्रस्तुत है निशांत की कुछ नवीनतम कवितायें। घोड़ा और तांगेवाला मेरे पास दुःख है और मेरे पास क्या है? पैरों में लग गए हैं चक्के छोटी हो गयी है पृथ्वी मेरा सुख तुम्हारे पास दुःख बन पहुँचता है मैं एक फूल छूता हूँ वह बाजार में बदल जाता है. ...