राजेन्द्र शर्मा का आलेख 'एक गजल से नवाज देवबंदी के मुरीद हो गये थे जगजीत सिंह'
जगजीत सिंह जगजीत सिंह के नाम से भला कौन ऐसा होगा जो वाकिफ नहीं होगा। उनकी मखमली आवाज़ किसी का भी मन मोहने के लिए पर्याप्त थी। जगजीत सिंह जितने ख्यात गजलकार थे, उतने ही विनम्र व्यक्ति और उसूलों के पक्के व्यक्ति भी थे। युवा शायर नवाज देवबंदी की एक गजल उन्हें इतनी प्रिय लगी कि उन्होंने उसे बिना पूछे ही अपनी आवाज में कंपोज कर दिया। लेकिन जब एच एम वी के एल्बम के लिए इस गजल को देने की बात आई, तब जगजीत सिंह ने उस समय के अनाम से शायर नवाज देवबंदी से इजाज़त मांगी। देवबंदी पहले ही कव्वाल अज़ीज़ नाजॉ को अपनी इस गजल के लिए जुबान दे चुके थे। खैर जब उन्होंने अज़ीज़ नाजॉ से इस सन्दर्भ में जब बात की तो उन्होंने सहज ही अपना प्रस्ताव खारिज करते हुए यह गजल जगजीत सिंह की आवाज में जाने की सहमति दे दी। तो ऐसे सहज और विनम्र व्यक्ति थे जगजीत सिंह। आज आठ फरवरी को उनके जन्मदिन पर 'पहली बार' विशेष तौर पर उनकी स्मृति को नमन कर रहा है। इस विशेष मौके के लिए कवि राजेन्द्र शर्मा ने एक आलेख लिखा है। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं राजेन्द्र शर्मा का आलेख 'एक गजल से नवाज दे...