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सुधा अरोड़ा से प्रेम भारद्वाज की बातचीत

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  मन्नू भंडारी के साथ सुधा अरोड़ा  किसी के मुंह पर खरी खरी बात कह देना आसान नहीं होता। वह भी तब जब बात प्रतिष्ठित कथाकार और हंस के सम्पादक राजेन्द्र यादव की हो। सुधा अरोड़ा ने इस कठिन को अपने साहस से आसान बनाया। पाखी के सम्पादक प्रेम भारद्वाज ने राजेन्द्र यादव को ले कर सुधा जी से एक लम्बा साक्षात्कार लिया था। इस साक्षात्कार में सुधा जी ने राजेन्द्र यादव के जीवन और व्यवहार के विभिन्न पक्षों पर बेबाकी से बात किया। बातचीत राजेन्द्र यादव की हो, और मन्नू भंडारी की बात न आए, भला यह कैसे हो सकता था। मन्नू जी जैसी धीर गम्भीर लेखिका ने कभी पलटवार नहीं किया। रचना की तरह उनका व्यक्तित्व भी साफ सुथरा था। राजेन्द्र यादव के स्त्री विमर्श की खासी चर्चा की जाती है। एक सवाल के जवाब में सुधा जी ने कहा -  'होना सोना' आलेख पर मेरी प्रतिकिया तब हुई जब उन्होंने अपने संपादकीय में विरोध करने वाली 'करवाचौथी औरतों' की जमात में मेरा भी नाम डाल दिया जबकि उस लेख पर कलम उठाने की मेरी कोई मंशा नहीं थी, न मैंने इसका जिक्र किया था। मैंने अपनी प्रतिक्रिया उन्हें सिर्फ पढ़ने के लिये भेजी थी पर उन्होंने अ...

प्रियदर्शन का आलेख 'उनकी नायिकाएं भी जानती हैं विद्रोह करना

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मन्नू भण्डारी के साथ प्रियदर्शन हिन्दी साहित्य का जो वितान आज बना है उसमें मन्नू भंडारी का नाम अग्रणी है। मन्नू जी कभी स्त्रीवादी विमर्श के दायरे में नहीं उलझीं बल्कि जीवन से जुड़ी जीवंत कहानियां लिखती रहीं। ऐसी कहानियाँ जो स्त्री जीवन से जुड़ कर भी सार्वभौमिक आयाम वाली होती हैं। 'कहानी की बात' मार्कण्डेय जी की आलोचना पुस्तक है जिसमें उन्होंने अपने समय के कुछ महत्त्वपूर्ण कहानीकारों पर बेबाक लिखा है। हालांकि इस प्रक्रिया में कुछ महत्त्वपूर्ण लेखक छूट भी गए। मार्कण्डेय जी को इस बात का अफसोस रहा कि कहानी की बात में वे मन्नू जी का जिक्र नहीं कर पाए जबकि वे एक दमदार रचनाकार रही हैं। वे योजना बनाते रह गए कि अवसर मिलते ही मन्नू जी पर लिखूँगा। अलग बात है कि वह अवसर वक़्त ने उन्हें फिर कभी दिया ही नहीं। बहरहाल आज मन्नू जी का जन्मदिन है। पहलीबार की तरफ से शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए और उनका अभिवादन करते हुए आज हम पहली बार पर प्रियदर्शन का आलेख प्रस्तुत कर रहे हैं। इस आलेख को हमने प्रियदर्शन जी की फेसबुक वॉल से साभार लिया है। आलेख की शुरुआत में हम प्रियदर्शन जी की टिप्पणी भी दे रहे हैं। तो आ...