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अनिला राखेचा के कविता संग्रह 'काजल की मेड़' की शैलेश गुप्त द्वारा समीक्षा "सपनों के संरक्षण की संघर्ष गाथा : 'काजल की मेड़'"

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  प्रेम जीवन का मूल है। प्रेम जीवन की खूबसूरती को कुछ और बढ़ा देता है। लेकिन प्रेम के सामने हजार तरह के खतरे भी होते हैं। प्रेम को हमारा समाज सहज रूप में स्वीकार नहीं कर पाता इसीलिए उसे जद्दोजहद भी करता है। अनिला राखेचा की कविताओं के मूल में यह प्रेम ही है जो मनुष्य को कहीं अधिक उदात्त बनाता है। हाल ही में वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से अनिला राखेचा का पहला कविता संग्रह  'काजल की मेड़' प्रकाशित हुआ है।  अनिला राखेचा के कविता संग्रह 'काजल की मेड़' की समीक्षा की है शैलेश गुप्त ने। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अनिला के कविता संग्रह पर शैलेश गुप्त द्वारा लिखी गई समीक्षा "सपनों के संरक्षण की संघर्ष गाथा : 'काजल की मेड़'"।  "सपनों के संरक्षण की संघर्ष गाथा : 'काजल की मेड़'" शैलेश गुप्त  शब्दों की कूची से कोलकाता की प्रतिष्ठित कवयित्री अनिला राखेचा ने अपने हृदय के  विविध मनोभावों को सपनों के इंद्रधनुषी रंगों से रंग कर कल्पना के कैनवास पर जो एक मनोहारी भाव प्रवण पेंटिंग उकेरी है, उस कविता संग्रह का नाम "काजल की मेड़" है। ये काव्य पें...

यतीश कुमार के काव्य संग्रह आविर्भाव पर शैलेश गुप्त की समीक्षा

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  आमतौर पर यह मान्यता है कि साहित्य में कोई नवोन्मेष नहीं हो सकता लेकिन कवि यतीश कुमार ने अपने हुनर से इस अवधारणा को गलत साबित किया है। अपने समय के कुछ क्लासिकल उपन्यासों को पढ़ते हुए उन्होंने समीक्षा की एक नई पद्धति विकसित की और उसे काव्य रूप में एक एक कर प्रस्तुत करना शुरू किया। इस क्रम में उन्होंने कुल 11 क्लासिकल रचनाओं की पड़ताल की और उन रचनाओं को एक एक कर काव्यात्मक विमर्श के आईने में समेटने की सफल कोशिश की। किसी न किसी रचना पर आधारित होते हुए भी इस संग्रह की कविताएं स्वतंत्र कविता के रूप में देखी पढ़ी जा सकती हैं और यही इनकी खूबी है। यानी कि इन कविताओं का आस्वाद दोहरा है। स्वतन्त्र भी और कृतिपरक भी। यह सारी कविताएं 'आविर्भाव' शीर्षक कविता संग्रह में संकलित की गई हैं एवं हाल ही में प्रकाशित हुई हैं। यतीश कुमार के इस 'आविर्भाव' कविता संग्रह की एक पड़ताल की है शैलेश गुप्त ने। तो आइए आज पहली बार पढ़ते हैं कवि यतीश कुमार के कविता संग्रह आविर्भाव पर शैलेश गुप्त की समीक्षा  'आविर्भाव : जटिल पुस्तकों पर सहज काव्य विमर्श'। आविर्भाव : जटिल पुस्तकों पर सहज काव्य विम...