अर्पिता राठौर का आलेख 'तर्क और तथ्य की देहरी पर'
माधव हाड़ा की हाल में ही सेतु प्रकाशन से एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक प्रकाशित हुई है ‘देहरी पर दीपक’। इस पुस्तक में विषयों की विविधता देखी जा सकती है। माधव जी हमेशा की तरह इस पुस्तक में भी तर्क और तथ्य के हवाले से अपनी बातें करते हैं। अर्पिता राठौर ने माधव हाड़ा की इस पुस्तक की पड़ताल करते हुए उचित ही कहती हैं 'उनका समस्त अध्ययन पुनर्व्याख्या की एक नवीनतम वैचारिक बुनियाद खड़ी करता है।' आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं अर्पिता राठौर का माधव हाड़ा की पुस्तक ‘देहरी पर दीपक’ पर एक विश्लेषणात्मक आलेख 'तर्क और तथ्य की देहरी पर'। अर्पिता का आलेख मधुमति के हालिया अंक से साभार लिया गया है। तर्क और तथ्य की देहरी पर अर्पिता राठौर “ दरअसल भारतीय समाज ऐसा समाज है , जो सतह पर कम , अंदर ज़्यादा है। सतह के दृश्य को प्रमाण हमारे यहाँ कभी नहीं माना गया। देहरी - दीपक न्याय हमारी आदत में है। हमारे यहाँ दीपक देहरी पर , बीच में है और इसका उजाला अंदर - बाहर सब जगह है। जो दीपक को केवल अंदर या बाहर रख कर उसके सीमित उजाले में सोचते - समझते हैं...