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भीष्म साहनी की कहानी 'अमृतसर आ गया है'

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  भीष्म साहनी  भारत जब आजाद होने वाला था तब एक अजीब सा धार्मिक उन्माद चारो तरफ फैल गया। चारो तरफ भय, अविश्वास और हिंसा का माहौल था। त्रासदी यह थी कि लोग आपसी भाईचारा भूल कर एक दूसरे की जान के प्यासे हो गए थे। इसी समय आबादी का व्यापक पैमाने पर एक हिस्से से दूसरे हिस्से में स्थानांतरण हुआ। इसे दुनिया में आबादी का सबसे बड़ा स्थानांतरण माना जाता है। इस समय के तमाम रचनाकारों ने अपनी रचनाओं में विभाजन के इस अध्याय को बारीकी से दर्ज किया है। इन रचनाओं के जरिए भी हम इस समय का एक बेबाक इतिहास जान सकते हैं। भीष्म साहनी ने इस दंश को अपनी आंखों से देखा और भुगता था। उनके उपन्यास 'तमस' का विषय भारतीय इतिहास का यह काला दौर ही है। कल  8 अगस्त को भीष्म साहनी का जन्मदिन था। इस अवसर पर हम उनकी स्मृति को नमन करते हुए उनकी प्रख्यात कहानी 'अमृतसर आ गया है' प्रस्तुत कर रहे हैं। 'अमृतसर आ गया है'  भीष्म साहनी गाड़ी के डिब्बे में बहुत मुसाफिर नहीं थे। मेरे सामने वाली सीट पर बैठे सरदार जी देर से मुझे लाम के किस्से सुनाते रहे थे। वह लाम के दिनों में बर्म...

प्रसिद्ध कथाकार भीष्म साहनी से अमीर चंद वैश्य का पत्र -संवाद

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प्रसिद्ध कथाकार भीष्म साहनी से अमीर चंद वैश्य का पत्र -संवाद   तब लोग एक दूसरे को पत्र लिखा करते थे और संवाद कायम करने का यह एक महत्वपूर्ण माध्यम था । तमाम व्यस्तताओं के बावजूद महात्मा गाँधी अपने पास आये हुए हर पत्र को पढ़ते थे और उसका जवाब जरुर देते थे । साहित्य में तो इन पत्रों की एक विशेष महत्ता रही है । केदार नाथ अग्रवाल और राम विलास शर्मा के बीच हुए पत्राचार को अब 'मित्र-संवाद' नाम की किताब के रूप में प्रकाशित कराया गया है । इस किताब से हम एक महत्वपूर्ण कवि की निर्माण प्रक्रिया और उसके संघर्षों के बारे में जान सकते हैं । यही नहीं इन पत्रों के जरिये हम उस समय के परिवेश और परिस्थिति का भी सहज ही आंकलन कर सकते हैं । मशहूर कहानीकार भीष्म साहनी की दो नयी पुस्तकें उनका नया उपन्यास ‘ कुंतो’ और नया नाटक ‘ मुआवजे’ पढ़ कर अमीर चंद वैश्य ने उनको 2 सितम्बर 1993 को एक पत्र लिखा था । भीष्म साहनी ने 15 नवम्बर 1993 को इस पत्र का जवाब दिया था । आज भीष्म साहनी के जन्मदिन के अवसर पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं अमीर जी और भीष्म जी के बीच हुआ वह पत्र संवाद । भीष्म जी के पत्र की मूल प्रति आपके लि...