विजेंद्र अनिल से सुमन कुमार सिंह व कवि बलभद्र की बातचीत
विजेंद्र अनिल कवि सुमन कुमार सिंह और बलभद्र ने विजेंद्र अनिल से 2001 में लंबी बातचीत की थी, जो 9 अगस्त 2001 के दैनिक हिंदुस्तान के मध्यांतर परिशिष्ट में शब्द साक्षी स्तंभ के तहत प्रकाशित हुआ था। दुबारा यह साक्षात्कार समकालीन जनमत के वर्ष 26, अंक 3 में प्रकाशित हुआ। 2 नंवबर 2007 को ब्रेन हैमरेज के आघात से विजेंद्र अनिल का निधन हो गया। इसके एकाध सप्ताह पहले ही कथाकार सुरेश कांटक से मुलाकात में उन्होंने नए सिरे से जम कर लिखने की योजना से अवगत कराया था। इधर उन्होंने आलोचक नागेश्वर लाल (जिनका दो वर्ष पहले निधन हो गया) पर एक लंबा लेख भी लिखा था। विजेंद्र अनिल के 15वें स्मृति दिवस पर उनकी स्मृति को नमन करते हुए हम प्रस्तुत कर रहे हैं उनकी सुमन कुमार सिंह व कवि बलभद्र से हुई विशेष बातचीत। ये तो सच है कि सभी शीशमहल टूटेंगे सुमन कुमार सिंह एवम बलभद्र जब मैं और कवि बलभद्र बक्सर के बहुचर्चित गाँव बगेन पहुँचे हमारे अंदर रहस्य- रोमांच से भरपूर कई किस्से उभरने मिटने लगे। ...मुन्ना सिंह के गीत की पंक्ति 'जहँवा वीर बहा...