कुँवर नारायण पर पंकज कुमार बोस का स्मृति लेख ‘एखनि अन्ध बन्ध करो ना पाखा’
कुँवर नारायण बीते 15 नवम्बर 2016 को हिन्दी के शीर्षस्थ और ख्यातनाम कवि कुँवर नारायण नहीं रहे । कुँवर जी की अन्तिम, लेकिन महत्वपूर्ण काव्य-कृति ‘कुमारजीव’ को केन्द्र में रखते हुए उनके अनन्य सहयोगी पंकज कुमार बोस ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का एक निष्पक्ष मूल्यांकन किया है। 'कुमारजीव' न केवल कुँवर नारायण की काव्यकृति है बल्कि यह कुमारजीव के बहाने से उनके दर्शन, उनके विचार और दृष्टि को हमारे सामने रखने वाली अहम् कृति भी है जिससे हो कर ही इस कवि को गहराई से जाना जा सकता है। आज पहली पर कुँवर जी की स्मृति को नमन करते हुए हम प्रस्तुत कर रहे हैं पंकज कुमार बोस का यह स्मृति-लेख ‘ एखनि अन्ध बन्ध करो ना पाखा’ । तो आइए आज पढ़ते हैं पंकज का यह स्मृति-लेख। एखनि अन्ध बन्ध करो ना पाखा पंकज कुमार बोस कुँवर नारायण ने अपने खण्डकाव्य ‘वाजश्रवा के बहाने’ में लिखा है : “मृत्यु इस पृथ्वी पर जीवन का अन्तिम वक्तव्य नही है।” जिस शीर्षक के अन्तर्गत ये पंक्तियाँ हैं, उसका नाम है ‘उपरांत जीवन’। ...