अल्पना मिश्र से कल्पना पन्त की एक बातचीत
अल्पना मिश्र युवा आलोचक कल्पना पन्त के साथ अल्पना मिश्र से कल्पना पन्त की एक बातचीत अल्पना मिश्र का उपन्यास ‘अन्हियारे तलछट में चमका’ इन दिनों काफी चर्चा में है । इस उपन्यास पर अल्पना को वर्ष 2014 का प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान भी प्रदान किया गया है। इस उपन्यास को भाषा के अलग अनूठे अंदाज और नये शिल्पगत प्रयोग के साथ साथ बदलते समय के प्रभावों के बीच निम्न मध्यवर्गीय जीवन की बहुत गहरी अन्तरकथा के लिए सराहा जा रहा है। इस उपन्यास के शिल्प और कला के साथ-साथ पात्रों के बहाने स्त्री जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों पर अल्पना मिश्र से एक बातचीत किया है कल्पना पंत ने। तो आइए रु-ब-रु होते हैं इस बातचीत से। कल्पना पंत – ‘अन्हियारे तलछट में चमका’ उपन्यास का शिल्प अपने में नवीनता लिए हुए है। उपन्यास को कई उपशीर्षकों में बांटने की जरुरत आपको क्यों महसूस हुई? अल्पना मिश्र - बस , मेरी कोशिश इतनी थी कि जो बात कहना चाहती हॅू , उसे खूब अच्छी तरह कह पाऊँ। टेकनीक नई थी तो शायद इसी से शिल्प भी बदलता चला गया। कहानी कहने के लिए आत्मकथा की टेकनीक को भी इसमें मिला ...