मार्खेज़ का नोबेल व्याख्यान -'लैटिन अमेरिका का एकान्त'
मार्खेज़ किसी भी समय का साहित्य अपने समय की सघनतम अनुभूतियों का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जिस साहित्य में अपने समय की अनुगूँज नहीं होती , वह दूर तक का सफ़र तय नहीं कर पाता। साहित्य इस अनुगूँज को दर्ज़ करने के क्रम में प्रायः ही उन स्वरों को पुख्तगी के साथ सामने रखता है जिसको अक्सर उपेक्षित या अनदेखा कर दिया जाता है। ग्रैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ ने इन स्वरों को जिस अंदाज़ में अपने लेखन में दर्ज़ किया उसे विश्व साहित्य में ‘ जादुई यथार्थवाद ’ का नाम दिया जाता है। मार्खेज़ ने नोबेल सम्मान प्राप्त करते समय जो भाषण दिया था उसमें लैटिन अमरीका के एकान्त को सहज ही महसूस किया जा सकता है। यह लैटिन अमरीका का त्रासद एकान्त था। यूरोपीय उपनिवेशवादी ताकतों की नृशंसता का जीवन्त दस्तावेज़ है लैटिन अमरीका। इन ताकतों ने न केवल इन देशों का बेरहमी से शोषण किया बल्कि उनकी भाषा , बोली , सभ्यता-संस्कृति को नष्ट कर अपना सब कुछ थोप दिया। आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं मार्खेज के उस नोबेल-उद्बोधन को , जो अपने आप में सब कुछ बयाँ कर देता है। इस उद्बोधन का हिन्दी अनुवाद किया है युवा आलोचक वैभव सिंह ने। हम...