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अमरकान्त जी से मुरलीधर और हिमांशु रंजन की बातचीत

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  प्रख्यात कथाकार अमरकान्त जी से एक अरसा पहले ज्ञानवाणी के स्टूडियो में एक साक्षात्कार लिया था कहानीकार मुरलीधर और कवि-आलोचक हिमांशु रंजन ने! यह अप्रकाशित बातचीत हमने अनहद में अरसा पहले प्रकाशित किया था । आज अमरकांत जी का जन्मदिन है। अमरकान्त जी को नमन करते हुए हम अनहद में पूर्व प्रकाशित साक्षात्कार को आज हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं। इस विशेष एवम काफी लम्बे साक्षात्कार को हमारे अनुरोध पर अक्षरांकित किया था युवा कथाकार शिवानन्द मिश्र ने। तो आइए आज पहली बार पर पढते हैं मुरलीधर और हिमांशु रंजन द्वारा अमरकांत जी से लिया गया विशेष साक्षात्कार ।       अमरकान्त जी से मुरलीधर और हिमांशु रंजन की बातचीत         मुरलीधर - आपको लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली तथा राजनीतिक रुझान और पेशेवर पत्रकारिता में आजीवन लिप्त रहते हुए आपने लेखन कार्य को कैसे साधा ? अमरकान्त – लिखने की हमें प्रेरणा एक तो हमारे पिता जी जो एडवोकेट थे वहाँ बलिया में और वहीँ एक चलता पुस्तकालय था, उनसे मिली । चलता पुस्तकालय वाले साइकिल पर पुस्तकें दे जाते थे । पिता जी को इ...