फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की की कहानी 'मारेय नाम का किसान' (अनुवाद : सुशांत सुप्रिय)
Fyodor Dostoevsky फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की न केवल रूस अपितु विश्व के अप्रतिम उपन्यासकार और कथाकार हैं । दोस्तोयेव्स्की छोटी-छोटी घटनाओं और परिस्थितियों को ले कर जिस सुगमता के साथ अपनी कहानियों की रचना करते हैं वह चकित कर देती है ैं । 'मारेय नाम का किसान' ऐसी ही एक कहानी है जिसमें जेल के बंदियों खासकर राजनीतिक बन्दी एम. के बहाने उस समय के रूस की राजनीतिक, सामाजिक स्थिति के बारे में खुल कर बात की गयी है ैं । तो आज पहली बार पर प्रस्तुत है फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की की कहानी 'मारेय नाम का किसान' । मूल रूसी कहानी का अनुवाद किया है कवि-कथाकार सुशान्त सुप्रिय ने । मारेय नाम का किसान मूल कथाकार : फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की (अनुवाद : सुशांत सुप्रिय) वह ईस्टर के हफ़्ते का दूसरा दिन था। हवा गर्म थी , आकाश नीला था। सूरज गर्माहट देता हुआ देर तक आकाश में चमक रहा था , पर मेरा अंतर्मन बेहद अवसाद-ग्रस्त था। टहलता हुआ मैं जेल की बैरकों के पीछे जा निकला। सामान स्थानांतरित करने वाली मशीनों को गिनते हुए मैं बंदी-गृह की म...