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कुबेर नाथ राय का आलेख 'इतिहास और शुक-सारिका कथा'

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कुबेर नाथ राय  इतिहास को देखने की दृष्टि विभिन्न विचारधाराओं में अलग अलग रही है। इतिहास पर राय व्यक्त करने के लिए इतिहासकार होना जरूरी नहीं। साहित्यकारों ने भी इतिहास को अपने नजरिए से देखने की कोशिश की है। स्वाभाविक रूप से उनकी दृष्टि एक इतिहासकार की दृष्टि से अलग होती है। भारत पर एक लम्बे समय तक मुसलमानों ने शासन किया। स्वाभाविक रूप से इस मुस्लिम शासन के पक्ष विपक्ष में बातें की जाती हैं। एक दृष्टि सेक्यूलर इतिहासकारों की है जिन्होंने अपने विश्लेषण में समन्वयवादी दृष्टिकोण को अपनाया। इस क्रम में हिन्दू मुस्लिम समन्वय पर ध्यान दिया गया। दरअसल इतिहास को सन्दर्भों से काट कर नहीं देखा समझा जा सकता। किसी भी परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए उस समय के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू को देखना जरूरी होता है। कुबेर नाथ राय को हम उनके बेहतर निबंधों के लिए जानते हैं। लेकिन इतिहास पर भी उनकी अपनी राय है जिसे उन्होंने अपने एक आलेख में साफ़गोई से व्यक्त किया है। कुबेर जी के इस आलेख में हम उनके उस पारम्परिक रुझान को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं जिसका झुकाव हिन्दुत्व की तरफ है। इस...